Winter Relief: इन सर्दियों में गरीबों को गर्माहट का तोहफ़ा दें।

सर्दियों में आपका प्यार बन सकता है उपहार

” तन की दूरी क्या कर लेगी

मन के पास रहो तुम मेरे

देख रहा हूँ मैं धरती से

दूर बहुत है चाँद बिचारा

किंतु कहा करता है मन की

बातें वह किरणों के द्वारा

– रमानाथ अवस्थी

यदि हम केवल दिल्ली की बात करें तो एक आकलन के अनुसार 17 लाख से ऊपर बेघर लोग इस शहर में सड़कों के किनारे, फटी हुई प्लास्टिक की पन्नियों से बने छोटे-छोटे अस्थाई घरों में निवास करते हैं, जो अक्सर हवा के तेज़ झोंके या भारी बारिश के साथ ढह जाते हैं। गिरते हुए तापमान और अपेक्षित कड़ी ठंड जो अपने साथ अनेक बीमारियां और अन्य प्रकार के नुकसान का कारण बनती है, इन गरीब और वंचित लोगों के लिए हानिकारक यहाँ तक कि घातक साबित होती है। हर साल ऐसी ठंड में कई लोग अपनी जान गवां बैठते हैं जिसकी ख़बर हम अपने घरों में गर्म कपड़ों में लिपटे , चाय की चुस्कियां लेते हुए सरसरी तौर पर पढ़ते हैं और ज़राही देर में अपनी ज़िंदगी में मुब्तिला होकर भूल जाते हैं।

सर्दियों में गर्म शॉल का सुकून पाते हुए एक लाभार्थी

मनोविज्ञान के द्वारा की गई रिसर्च ये दर्शाती हैं कि ठंड हमारी मनोदशा पर बुरा प्रभाव डालती है और हमें मानसिक तौर पर बीमार कर सकती है । ऐसे में छोटी-छोटी परेशानियां पहाड़ लग सकती हैं, उत्साह खत्म हो जाता है और ज़िंदगी अक्सर बोझ लगने लगती है। पोषण की कमी इस भावना को और तूल देती है।जिसके पास जीवित रहने के ही संसाधन नहीं हैं वह मानसिक बीमारी के बारे में क्या ही सोचेगा और इससे जूझने के लिए कितना ही कर लेगा। इसी प्रकार ग़ुर्बत का चक्रव्यूह बना रहता है या यूं कहें कि ग़रीब सामाजिक वर्ग में और भी नीचे गिरता चला जाता है। हाल ही में आई वर्ल्ड इनइक्वालिटी रिपोर्ट 2022 ने हमारी बात को और पुष्ट कर दिया है। यह रिपोर्ट कोविड – 19 के बाद भारत में बढ़ी हुई ग़रीबी और असमानता पर रौशनी डालते हुए दर्शाती है की भारत का 57 प्रतिशत राष्ट्रीय आय ऊपरी वर्ग के 10 प्रतिशत लोगों के पास है जबकि निचले 50 प्रतिषत वर्ग के पास सिर्फ़ 13 प्रतिशत आय है।निचले वर्गीय लोगों के लिए यकीनन हर दिन एक नई लड़ाई है जिससे अक्सर थक कर लोग जीवन जीने की चाह खो बैठते हैं।

सर्दियों से राहत पाकर धन्यवाद करती हुई एक बुजुर्ग लाभार्थी

क्रिसमस, न्यूईयर, लोहड़ी जैसे कई त्योहार जिनको हम परिवार संग ज़ोरों शोरों से मनाते हैं ठंड के मौसम में आते हैं। हम अपने घरों को मिठाइयों से भरलेते हैं और अनेक प्रकार के पकवान ज़रूरत से ज़्यादा मात्रा में बना लेते हैं, क्योंकि हमारे पास संसाधन हैं । जिस समय हम स्वेटर, जैकेट वगैरह से लदे घर की गर्माहट में त्यौहार के नशे में गुल होते हैं , बाहर कोई अकेला, जिस्म पर चिथड़े लिए, भूख और ठंड से ठिठुरता है।

“वे रहीम नर धन्य हैं, पर उपकारी अंग।

बाँटनवारे को लगै, ज्यौं मेंहदी को रंग॥”

– अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना

रहीम कहते हैं कि वो इंसान जो हमेशा दूसरों का भला करता है वो धन्य है और उसकी अच्छाई मेंहदी लगाने वाले जैसी है जिसके हाथों में मेंहदी का रंग रह ही जाता है। इस रंग की मानिंद ये अच्छाई उसके साथ रह ही जातीहै ।

दिल्ली में स्थापित विशेज़ एंड ब्लेसिंग्स एनजीओने ठंड से जूझते वंचित लोगों के लिए 2014 में एक खास प्रोग्राम लॉन्च किया ।इस प्रोग्राम के तहत दिसंबर और जनवरी के बीच हर शुक्रवार, ऑफिस स्टॉफ़ के सदस्य तथा अन्य कर्मचारी बेघर लोगों को स्वेटर, ग्लव्स, कंबल, शॉल, टोपी, मोज़े, मफ़लर, जैकेट इत्यादि बाँटते हैं। हर साल की तरह इस साल भी विशेज़ एंड ब्लेसिंग्स दिल्ली एनसीआर , झारखंड और पश्चिम बंगाल में 6 अलग अलग ड्राइव्स आयोजित कर ठंड से लड़ने का सामान बाँट रहा है।

सर्दियों से बचाने के लिए एनजीओ के प्रति आभार प्रकट करती एक महिला

आप भी इस नेक काम का हिस्सा बन सकते हैं और विशेज़ एंड ब्लेसिंग्स या अन्य एन जी ओ से जुड़कर तथा अपनी ख़ुदकी डिस्ट्रिब्यूशन ड्राइव्स आयोजित कर अपनी कॉलोनी, स्कूल एवं कालेज के लोगों के साथ जमा होकर बाँट सकते हैं कंबल, स्वेटर, शॉल इत्यादि। आप बेहतर बना सकते हैं जीवन ऐसे अनेक लोगों का जो जिंदगी की कठिनाइयों से निम्नतम संसाधनों के साथ जूझ रहे हैं। अगर हर व्यक्ति अपने हिस्से की भलाई कर गुज़रने की ठान ले तो देश भर में फैले अभाव का एक बड़ा हिस्सा निपट सकता है। फ़र्क़ केवल इरादे और इस इरादे को अंजाम तक पहुँचाने का है । विशेज़ एंड ब्लेसिंग्स एन जी ओआपकी इसी दुविधा को सरल करने के लिए ज़ोरों-शोरों से प्रयासरत है ।

दान कीजिए , प्यार बाटिए , खुशियां फैलाइए ।


About the Author

Ayesha Najeeb is the CSR Associate at Wishes and Blessings. She has done her Bachelor’s in Psychology from Aligarh Muslim University and Masters in Social Work from Jamia Millia Islamia. Ayesha is passionate about human rights, culture, literature and history. She firmly believes that poetry and art can be efficiently employed in bringing social change.